Match Fixing in India/IPL: Is It Real?

Match Fixing: Is It Real?

Disclaimer: यह सारी जानकारी CBI, Delhi Police और Mumbai Police द्वारा प्रसारित की गई रिपोर्ट के अनुसार है। हमारा उद्देश्य सिर्फ सही जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाना  है। इस लेख के अंत मे सारे रिपोर्ट की लिंक साझा की गई है। आप चाहे तो विस्तार मे पढ़ सकते है।

अगर कोई खेल की बात की जाए तो आज के समय मे पूरे विश्व मे सबसे ज्यादा फुटबॉल लोकप्रिय खेल माना जाता है, और यही दूसरे पायदान पर काफी तेजी से लोकप्रिय बन रहा खेल क्रिकेट आता है, जी हा, क्रिकेट विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल है। भारत मे तो इस खेल की लोकप्रियता एक अलग लेवल पर ही देखने को मिलती है। कोई भी इंसान फिर वह चाहे क्रिकेट मे रुचि रखता हो या न रखता हो पर उसके दिमाग मे यह सवाल या उलजन जरूर होगी की क्या क्रिकेट मैच फिक्स हो सकता है या फिर नहीं और अगर होता है तो क्यू और कैसे? अगर आपके मन मे भी यह उलजन है तो आज हम आपकी यह उलजन दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे।

भारत अपना पहला विश्वकप साल 1983 मे कपिलदेव की कप्तानी मे जीता था और यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि माना गया क्युकी उस समय भारतीय क्रिकेट उतना दमखम नहीं रखता था जितनी मजबूत भारतीय टीम आज है, या फिर एक तरह से आप यह भी कह सकते है की उस समय दो-तीन टीमे ही ऐसी थी जिसमे कांटे की टक्कर होती थी, जैसे की वेस्टइंडिस, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड। उस समय तक तो क्रिकेट के दर्शकों तो यह तक पता नहीं था की एक क्रिकेट मैच फिक्स भी  हो सकता है।

भारत के 1983 मे विश्वकप जीतने के करीब 11 साल बाद सितंबर 1994 मे ऑस्ट्रेलियाई टीम 3 टेस्ट मेचो की शृंखला खेलने पाकिस्तान जाती है। और यही वो समय था जब आम लोगों को पता चला Match Fixing के बारे मे। यह शृंखला खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न ने एक ऐसा बयान दिया की क्रिकेट की दुनिया मे तहलका मच गया। शेन वॉर्न  ने कहा की पाकिस्तान के सलीम मलिक शृंखला के समय उनके होटेल रूम मे आए थे और उन्होंने वॉर्न से कहा की पाकिस्तान की टीम अगर पाकिस्तान मे ही हार जाएगी तो हमारे घर जला दिए जाएंगे। और इस लिए आप $276,000 (करीब 2 करोड़ रुपये ) ले लो और यह वाला मैच हार जाओ। और यह बात शेन वॉर्न, टीम मे और मार्क वो ने अपने कोच, कप्तान और मैच रेफरी को उस समय बता दी थी। इस बात का जिक्र वॉर्न ने अपनी डॉक्यूमेंट्री मे भी किया है।  

यह बात जब बाहर आई तो लोगों का गुस्सा सातवे आसमान पर था। लोगों का इतना गुस्सा देखकर पाकिस्तान मे जस्टिस फखरूद्दीन इब्राहीम और जस्टिस मलिक मोहम्मद कयुम ने अलग से एक कमिशन बनाया और अलग अलग घटनाओ को उठाकर जांच शुरू कर दी ताकि पता चल पाए की सच मे मैच फिक्सिंग हो रही थी या नहीं। इस जांच का उत्कर्ष यह निकला की इसमे दो खिलाड़ियों का नाम सामने आया एक सलीम मलिक और दूसरे वसीम अकरम। इस जांच के अंत मे कमीशन ने  सलीम मलिक पर आजीवन बेन लगा दिया और वसीम अकरम के खिलाफ पुख्ता सबूत न मिलने पर उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसिके साथ सलीम मलिक विश्व के पहले क्रिकेटर बने जो Match Fixing के आरोप मे बेन हुए और जिन्हे जैल भी भेजा  गया। लेकिन आगे जाकर 2008 मे पाकिस्तान के एक लोकल अदालत ने यह बेन हटा दिया था। 

इस घटना के तीन साल बाद यानि की 1997 मे  मैच फिक्सिंग का एक और मामला सामने आता है जब आउट्लुक मेगेजीन भारतीय क्रिकेटर मनोज प्रभाकर का इंटरव्यू ले रही थी, तभी मनोज ने यह बताया की कुछ साल पहले 1994 मे श्रीलंका मे सिंगर कप करके एक शृंखला खेली जा रही थी जहा पर मुझे मेरे ही एक साथी खिलाड़ी द्वारा मैच हारने के लिए 25 लाख ऑफर किए गए थे। आगे जाकर BCCI के पूर्व अध्यक्ष आइ. एस. बिन्द्रा ने कहा की यह 25 लाख किसी ओर ने नहीं बल्की भारत के माइकल जोर्डन माने जाने वाले कपिल देव ने ही ऑफर किए थे। इसके बाद BCCI ने पूछताछ शुरू करवा दी जिसे भारत के मुख्य न्यायाधीश यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ लीड कर रहे थे। कई दिनों तक पूछताछ चलती है और अंत मे अक्टूबर 1997 मे चंद्रचूड़ रिपोर्ट सामने आई जिसमे लिखा गया था की भारत मे काफी बड़े लेवल पर सट्टा खेला जा रहा है लेकिन यहा पर प्रॉब्लेम हमारे कानून व्यवस्था की है।

इसके तीन साल बाद साल 2000 मे दक्षिण अफ्रीका भारत आती है 2 टेस्ट और 5 ODIs की शृंखला खेलने के लिए। जो की 19 फरवरी से 19 मार्च तक खेली जानी थी। इसी दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम और छोटा शकील का आदमी जिसका नाम था सलीम हथेली। जो की भारत मे बड़े बड़े लोगों से फिरौती और हप्ता लेता था। इसी समय सलीम हथेली ने अपोलो टायर्स और खन्ना ज्वेलर्स के मालिकों से फिरौती मांगी। और इन दोनों ने फिरौती न देकर पुलिस को बताया। पुलिस ने सलीम हथेली द्वारा इन दो बिसनेसमेन पर आ रही कॉल्स को चालू रखवाया ताकि पता चल पाए की सलीम का नेटवर्क कहा तक फैला हुआ हैऔर पुलिस जैसा जैसा कहते गए वैसा वे दोनों करते गए। इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह इन सब चीजों का ट्रेक रिकॉर्ड रखते थे। ईश्वर सिंह को यह सब माहिती रखते हुए एक शोकिंग चीज पता चलती है। सलीम जिन जिन को कॉल कर रहा था उन्मे से एक नंबर ऐसा था जिसका बहुत समय पहले कृष्ण कुमार ने भी उपयोग किया था। यह कृष्ण कुमार ओर कोई नहीं T-Series के मालिक गुल्शन कुमार के भाई थे और गुल्शन कुमार की हत्या के पीछे भी अंडरवर्ल्ड का ही नाम लिया जा रहा था। पुलिस ने अब कृष्ण कुमार का भी नंबर टेप करना शुरू कर दिया और दो हवलदार दिन रात कॉल्स को टेप करते थे।

19 फरवरी 2000 को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुंबई के वानखेडे मे पहला मैच होना था और भारतीय टीम उस वख्त ताज होटेल मे रुकी हुई थी। इसके दो दिन पहले ही कृष्ण कुमार के दोस्त संजीव चावला लंदन से मुंबई आते है और वही ताज होटल मे रुकते है। संजीव चावल के पास भारत का नंबर न होने के कारण कृष्ण कुमार उन्हे अपना नंबर दे देते है। मतलब पुलिस अब कृष्ण कुमार के नहीं बलकी संजीव चावला के कॉल्स सुन रही थी। कई दिनों तक कॉल्स सुनने के बाद उन दो हवलदारों ने यह कहा की कृष्ण कुमार को कोई तालुक अंडरवर्ल्ड से नहीं है ये बस पूरा दिन क्रिकेट की ही बाते करते रहते है जैसे की कैच पकड़ लिया, छोड़ दिया, रन बनाए वगेरा। ऊपरी अफसरों ने कहा की यह शायद कोई कोड हो, तो वे कहते है की यह भी नहीं है क्युकी वे लाइव मैच के हिसाब से ही बाते करते है। कभी कभी बीच मे कोई इंग्लिश बोलने वाला आता है और बस यह दोनों बाते करते है ओर कुछ नहीं है।

इस घटना के कुछ दिनों बाद उन दो हवलदारों मे से एक अपने घर मे बैठकर टीवी देख रहा था। इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हेनसी क्रोन्जे कमेंट्री करने आते है। और हेनसी क्रोन्जे की आवाज सुनकर वो हवलदार चौंक उठता है। वोह सोचता है की यह तो वही आवाज है जो वो दिन रात कॉल टेपिंग मे सुनता था। यह बात हवलदार आगे अपने ऊपरी अफसरों को बताता है और पुलिस इसको बड़ी गंभीरता से लेती है। पुलिस पहले तो दूरदर्शन से उस मेच का फूटेज मँगवाती है और वे कॉल रिकॉर्डिंग से मेच करती है। जो की एकदम सेम निकलती है।

लेकिन सिर्फ इतना सबूत काफी नहीं था इसलिए पुलिस ने फिर से सारी कॉल रिकॉर्डिंग सुनी तो पता चला की ये लोग जो मैच की बाते फोन पर करते थे वही सब अगले दिन मैच मे होता  था। जैसे की पहले बल्लेबाजी कौन करेगा, पहला ओवर कौन फेकेगा वगेरा। तो इस तरह अपोलो टायर्स और खन्ना ज्वेलर्स के एक अंडरवर्ल्ड के केस पर काम करते करते भारत का पहला Match Fixing का मामला इत्तफाक से सामने आया न की सोचे समजे प्लान के तहत। पुलिस के पास काफी सबूत तो मौजूद थे लेकिन अगर उसी समय पुलिस कार्यवाही करती तो दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम को हिरासत मे लेना पड़ता जो की दोनों देशों मे काफी बड़ा मुद्दा बन जाता, तो पुलिस ने शृंखला खत्म होने तक राह देखना सही समजा। लेकिन इसके चलते पुलिस को एक बड़ा नुकसान यह होता है की संजीव चावला लंदन निकल जाता है, जो की आखिरकार साल 2020 मे पकड़ा जाता है।

पुलिस अभी भी कॉल टेप कर ही रही थी और इसी वख्त पुलिस को संजीव चावला और हेनसी क्रोन्जे की एक बातचीत सुनाई देती है जहा पर हेनसी ने कहा चिंता मत करो निकी बोजे, हर्षल गिब्स और पीटर 20 से ज्यादा रन नहीं बनाएंगे। दूसरी ओर से संजीव चावला ने कहा की अगर भारत ने पहले बल्लेबाजी की तो क्या होगा। तो हेनसी क्रोन्जे कहते है की चिंता मत करो ऐसा हुआ तो भी भारत 250 से ज्यादा रन नहीं बनाएगी। अगले दिन मैच होता है भारत पहले बल्लेबाजी करती है और 248 रन ही बना पाती है और इसके बाद दक्षिण अफ्रीका खेलने आती है और हर्षल गिब्स ठीक 19 रन , निकी बोजे 14 रन और पीटर 1 रन बनाते है। इसके बावजूद दक्षिण अफ्रीका मैच जीत जाती है।

शृंखला खत्म होने पर पुलिस केस फ़ाइल करती है और सारे सबूत पेश करती है। इसके जवाब मे हेनसी क्रोन्जे कहते है की यह सब झूठ है। दक्षिण अफ्रीका भी एक कमीशन बनाती है और पूछताछ शुरू करती है आखिरकार हेनसी पर दबाव आने की वजह से वे मानते है की हा उन्होंने मैच फिक्सिंग की थी। हेनसी क्रोन्जे कई बार बयान देते देते रो भी पड़े थे। YouTube पर एक AP Archive नाम से चेनल है जिसने अपनी चेनल पर हेनसी क्रोन्जे के बयान वाले कई वीडियो अपलोड किए हुए है, आप चाहे तो जाकर देख सकते है। 

इसके थोड़े ही समय बाद तारीख आती है 15 जून 2000. जिस दिन मैच फिक्सिंग को लेकर सबसे बड़ा खुलासा होता है भारत मे, जब हेनसी क्रोन्जे का एक बयान सामने आता है जिसमे वे कहते है की हा, मैंने पैसे लिए थे मुकेश गुप्ता (एम. के. गुप्ता) से, जिससे मुझे पहली बार मोहम्मद अज़हरूद्दीन ने मिलवाया था। उस समय मुकेश गुप्ता ने मुझे $30,000 दिए और मैच हार जाने को कहा। जो की एक टेस्ट मैच था जो कानपुर मे खेला गया था। टॉस कौन जीतेगा, 11 खिलाड़ी कौन कौन से होंगे, पहले ओवर कौन डालेगा वगेरा बताने के लिए मुझे एम. के. गुप्ता ने $50,000 दिए। इस बयान के बाद भारत मे क्रिकेट प्रेमियों का गुस्सा फुट पड़ा और यह केस CBI के हवाले कर दिया गया।

CBI के हाथ मे केस आते ही एम. के. गुप्ता फरार हो जाता है, जो की बाद मे पकडा भी जाता है। CBI द्वारा पूछताछ शुरू होते ही पहले तो गुप्ता कहता है की मै कुछ भी नहीं बता सकता, अगर बताया तो मै जान से मारा जाऊंगा। लेकिन आगे जाके थोड़ा प्रेशर बनाने के बाद गुप्ता सब उगलने लगता है। एम. के. गुप्ता एक बैंक मे सामान्य नौकरी करता था, अपने नौकरी के समय वोह बैंक मे होता था और उसके बाद गुप्ता मैच मे पैसे भी लगाया करता था। लेकिन अच्छा पढ़ा लिखा आदमी था।  जो की इस क्षेत्र यानि सट्टेबाजी मे काफी कम लोग ऐसे होते है। इसी वजह से अंडरवर्ल्ड ने गुप्ता की इस खूबी को परखा और एक अलग काम पर लगा दिया। एम. के. गुप्ता को कहा गया की भारत मे जो लोकल मेचीस होते है जैसे की रणजी ट्रॉफी, दुलीप ट्रॉफी वगेरा वो जाके देखे और उन्मे से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचाने और उनसे नज़दीकियाँ बढ़ाए ताकि आगे जाकर वे हमारे काम आए।

एम. के. गुप्ता को जैसे कहा गया वैसे ही वह करता जाता है, गुप्ता लोकल मेचीस देखने लगा। साल 1988 मे दिल्ली मे रामचरण अगरवाल टूर्नामेंट हो रहा था। जिसमे अजय शर्मा नाम का एक युवा खिलाड़ी था जो काफी गरीब परिवार से आता था लेकिन प्रतिभाशाली खिलाड़ी था। टूर्नामेंट के खत्म होने के बाद एम. के. गुप्ता अजय शर्मा को जाके मिलता है उसे कहता की मै आपका बहुत बड़ा फेन हूँ, 2000 रुपये भी देता है और कहता है की कोई भी जरूरत हो तो वे उसे बताए। इसके बाद उसे जो भी आर्थिक मदद चाहिए होती थी या फिर क्रिकेट किट वगेरा गुप्ता उसे देने लगा। इसके करीब दो साल बाद यानि की सन् 1990 अजय शर्मा का भारतीय क्रिकेट टीम मे चयन हो जाता है।

जिस सीरीज के लिए अजय शर्मा का चयन हुआ होता है वोही भारत और न्यूज़ीलैंड की सीरीज जो की न्यूज़ीलैंड मे हो रही थी उसकी सारी जानकारी अजय शर्मा एम. के. गुप्ता को भेजता जाता है और इससे दोनों खूब पैसे कमाते है। न्यूज़ीलैंड मे चल रही इस सीरीज मे अजय शर्मा का रूममेट था मनोज प्रभाकर। अजय द्वारा दिए गए बयान मे उसने कहा था की वो तो नया था उनको सारी जानकारी मनोज बताते थे। CBI के रिपोर्ट मे यह लिखा था की मनोज को चौड़े टायर वाली जिप्सी चाहिए थी। तो एम. के. गुप्ता ने कहा की अगर वे अरविंदा डी सिल्वा से मिलवा देंगे तो उन्हे वो जिप्सी मिल जाएगी। और गुप्ता के कहे मुताबिक मनोज उन्हे अरविंदा डी सिल्वा से मिलवा देते है और मनोज को जिप्सी मिल जाती है।

CBI के पूछताछ के घेरे मे जब मनोज प्रभाकर आए तो उन्होंने कहा की सन् 1992 मे जो भारत और ऑस्ट्रेलिया शृंखला की डील हुई थी तो उसमे नवजोत सिंह सिधु भी शामिल थे और सन् 1994 के सिंगर कप मे  कपिल देव ने 25 लाख का ऑफर दिया था मैच हारने के लिए। आगे चलते साल 1991 मे रणजी ट्रॉफी का फाइनल था दिल्ली और बॉम्बे के बीच वो भी फिक्स करवाया। उस समय दिल्ली जानबूजकर हार गई, तब अजय शर्मा दिल्ली की टीम मे ही था तो हारने मे आसानी रही। CBI की रिपोर्ट मे यह भी लिखा है की मोहम्मद अज़हरुद्दीन अजय शर्मा को यह बताते है की उनकी गर्लफ्रेंड एक फेशन शो करवा रही है तो उस के लिए उनको 1 करोड़ रुपये की सख्त जरूरत है। तो अजय शर्मा कहता है की एम. के. गुप्ता करके एक आदमी है जो की इतने पैसों की व्यवस्था करवा सकता है। इसके बाद अजय शर्मा मोहम्मद अज़हरुद्दीन और एम. के. गुप्ता की एक मीटिंग फिक्स करता है दिल्ली के ताज पेलेस होटेल मे। यह साल 1995 की बात है।  इस मीटिंग अज़हरुद्दीन कहते है की वोह सारी जानकारी के साथ यह तक बता देंगे की कौन सा मेच भारत जीतेगी और कौनसा हारेगी। इस डील के लिए अज़हरुद्दीन को 50 लाख एडवांस मे ही मिल जाते है और 50 लाख काम पूरा होने के बाद।

CBI के पूछताछ मे एम. के. गुप्ता ने यह बताया की अज़हरुद्दीन ने पक्के तौर पर बोला था की भारत टाइटन कप हारेगी जो की 1996 मे खेला जा रहा था। उसी हिसाब से मैच मे बहुत पैसे लगे थे। मैच शुरू होता है, मोहम्मद अज़हरुद्दीन 1 रन बनाकर आउट हो जाते है। अजय जडेजा 62 गेंदों पर 27 रन बनाकर रन आउट हो जाते है। सब कुछ प्लान के हिसाब से चल रहा था लेकिन आते है सचिन तेंदुलकर और 111 गेंदों पर 88 रन बनाकर अकेले दम पर यह मैच भारत को जीता देते है। जिस वजह से इन सट्टेबाज़ों का बहुत नुकसान हो जाता है। इस पूरी फिक्सिंग मे जहा फिजियों तक शामिल था छोटी से छोटी जानकारी देकर पैसे लेने के लिए वही पर सचिन तेंडुलकर और सनथ जयसूर्या ने साफ साफ मना कर दिया था कुछ भी ऐसा करने के लिए।

CBI ने सचिन तेंदुलकर को भी बुलाया था, वहा सचिन ने कहा की मोहम्मद अज़हरुद्दीन खेल मे अपना 100% नहीं दे रहे थे। जब की टीम की ओर से कोई भी ऐसी सूचना नहीं दी गई थी, धीमा खेलने के लिए तब भी मनोज प्रभाकर और नयन मोंगिया काफी धीमा खेल रहे थे, जिसकी वजह से मैच खत्म होने के बाद सचिन उन पर गुस्सा भी हो गए थे और उनसे बात भी करनी छोड़ दी थी। इस पूछताछ के बाद CBI ने अज़हरुद्दीन को बुलाया और अज़हरुद्दीन ने शुरू मे तो तो इस सबको बकवास बताया। लेकिन CBI ने जब जायदाद के कागज, गाड़ियों की लिस्ट दिखाई और कहा की बगल वाले कमरे मे एम. के. गुप्ता भी बैठे है अगर आप नहीं मान रहे तो आपके सामने बिठाकर बात करवा देते है। तब जाकर मोहम्मद अज़हरुद्दीन माने। CBI ने अज़हरुद्दीन के कॉल रिकॉर्ड्स भी मँगवाए थे उनके कॉल सभी सट्टेबाजों को गए थे। ये लोग जितना भी पैसा लेकर मैच फिक्स करते थे वोह सारे पैसे होटेल ताज पेलेस मे एक लॉकर खुलवाकर रखा था, उसमे रखते थे। इस बात की पुष्टि एम. के. गुप्ता ने और ताज पेलेस होटेल के स्टाफ ने भी की। इन मैच फिक्सिंग मे एक-दो नहीं कई खिलाड़ी शामिल थे जैसे की अजय जडेजा ने चेन्नई के सट्टेबाज उत्तम चंद उर्फ टोपी को मैच की जानकारी देकर Match Fixing को अंजाम दिया था, जिसकी भी कॉल रिकॉर्डिंग CBI के हाथ लगी थी।

शायद आप नहीं जानते होंगे की सुनील गावस्कर, रवि शास्त्री, नवजोत सिंह सिद्धू और BCCI के पूर्व अध्यक्ष इन सभी के स्टिंग ऑपरेशन किए गए थे जहा पर एक केमरा छुपा हुआ होता है और यह बड़े बड़े खिलाड़ी बाते कर रहे होते है की फिक्सिंग मे क्या क्या हुआ होगा। यह सारे वीडियो YouTube पर tehelkatv नाम से एक चेनल है जिस पर Fallen Hero के नाम से उपलब्ध है, आप चाहे तो आज भी देख सकते है।

यह सारी पूछताछ के बाद CBI ने अक्टूबर 2000 मे 75 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की और उसको उस वख्त के यूनियन स्पोर्ट्स मिनिस्टर सुखदेव सिंह ढिंडसा को सौंपी। जिसके अंतर्गत CBI यह कहती है की बहुत बड़े पेमाने पर मैच फिक्सिंग हो रही है और CBI ने इसमे 5 भारतीय खिलाड़ी और नौ अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के नाम लिए। लेकिन उस वख्त के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार मुखर्जी और सॉलिसीटर जनरल ऑफ इंडिया हरीश सालवे ने कहा की CBI ने जो यह केस बनाया है यह टिकेगा नहीं, क्युकी इसको लेकर भारत मे कायदे ही नहीं बने है। रिपोर्ट के अनुसार 4 केस बन सकते है इन खिलाडीयो पर। 1. Public Act, 1867 (सट्टा खेलने के लिए ), 2. Section 120A I.P.C. (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी के लिए ), 3. Section 415 I.P.C. (चीटिंग के लिए) और 4. Prevention of Corruption Act, 1988 (करप्शन के लिए)।

लेकिन ये जीतने भी कानून बताए जा रहे थे, तो यह लोग कोई सट्टा तो नहीं खेल रहे थे, न तो कोई क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी थी, चीटिंग भी साबित करनी आसान नहीं थी। कोई खिलाड़ी धीमा खेल रहा है वोह जानबूजकर खेल रहा है या नहीं यह पक्के तौर पर कह पाना या फिर साबित करना नामुमकिन है। करप्शन का गुनाह भी नहीं लग सकता था क्युकी यह खिलाड़ी कोई पब्लिक अधिकारी नहीं थे। फिर भी अज़हरुद्दीन और अजय शर्मा को सजा दिलवाने की कोशिश हुई क्युकी अज़हरुद्दीन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मे और अजय शर्मा सेंट्रल वेरहॉउसिंग कॉर्पोरेशन मे काम करते थे। लेकिन ये दावे भी आगे जाकर कमजोर पड़ गए क्युकी इन लोगों ने ये जो हल्के काम किए थे ये पब्लिक अधिकारी के रूप मे नहीं  बल्की BCCI के खिलाड़ी बनकर कीए थे। इसी वजह से आप देखेंगे की जब भी कोई Match Fixing का मामला सामने आता है तो खिलाड़ी पर कोई लंबी कार्यवाही नहीं होती सिर्फ BCCI द्वारा बेन लगाया जाता है लेकिन ये खिलाड़ी जेल नहीं जाते। भारत मे क्रिकेट को लेकर लोग इतने भावुक होते है की अगर भारत मैच हार जाए तो कई लोग तो खाना भी नहीं खाते, ऐसे मे अगर ऐसी Match Fixing की खबरे सामने आए तो लोगों का गुस्सा कितना होगा यह सब अच्छी तरह से जानते है। कई खिलाड़ी चंद पैसों के लिए अपना ईमान बेच देते है जिस देश के नामवाली जर्सी पहनी होती है उनकी भी इज्जत करना नहीं समझते। जब 140 करोड़ लोग 11 खिलाड़ियों के खेल पर अपनी आस लगाए बैठे होते है उनके सामने इन पैसों के क्या मायने होते होंगे। लेकिन हमे सिक्के की दोनों बाजू को देखना चाहिए, ऐसा नहीं है की क्रिकेट के सारे खिलाड़ी ऐसे ही होते है, जहा पर कुछ खिलाड़ी पैसों के लिए अपने देश की इज्जत बेच देते है वही पर कई खिलाड़ी अपने देश का नाम रोशन करने के लिए जी-जान से खेलते है और अपना 100% देते है। उम्मीद है की भारत मे ऐसी Match Fixing के खिलाफ भी सख्त कानून बनाए जाएंगे और उन पर सख्ती से अमल भी होगा।

Reference:

Justice Qayyum Report: http://static.cricinfo.com/db/NATIONAL/PAK/NEWS/qayyumreport/qayyum_report.html

CBI Report: https://dokumen.tips/download/link/cbis-report-on-cricket-match-fixing-and-related-malpractices.html

Azharuddin Judgement: https://www.scribd.com/document/123911106/Mohammed-Azharuddin-Judgment

South Africa Fixing: https://www.scribd.com/document/425675102/India-South-Africa-Cricket-Match-2000-Scandal

The High Court Of Delhi: https://www.livelaw.in/pdf_upload/pdf_upload-370513.pdf

Chandrachud Report: https://eparlib.nic.in/bitstream/123456789/712524/1/148.pdf

Special Thanks To:

Nitish Rajput (YouTuber)

(For Reference)